सेटेलाइट से ली गई तस्वीरों से पता चलता है कि चीन डोकलाम में नकु ला क्लैश जोन के पास मिसाइल साइटों का निर्माण कर रहा है - Today News in hindi
Today News in hindi – उपग्रह इमेजरी ने शुक्रवार को पता चला की चीन LAC में भारत के बॉर्डर के पास दो Air Defence Positions को विकसित कर रहा है, जो 2017 डोकलाम स्टैंड-ऑफ क्षेत्र को कवर करेगा और इसकी जद में सिक्किम का नाकू-ला भी होगा। जिस जगह पर इस साल भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच टकराव हुआ था।
वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पूर्वी खंड पर Air Defence Positions के निर्माण के चीनी प्रयास भारत के साथ लद्दाख में पश्चिमी क्षेत्र में जारी तनाव के कारण भी हो रहे हैं।
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चीनी Air Defence Positions के बारे में जानकारी एक प्रमुख ट्विटर हैंडल के द्वारा सामने आई, जो नियमित रूप से उपग्रह इमेजरी के बारे में पोस्ट करता है। उसने शुक्रवार को एक ताजा पोस्ट की जिसमें इस बात की जानकारी मिली।
भू-राजनीतिक खुफिया प्लेटफॉर्म सिमटैक के साथ संयुक्त अध्ययन के हिस्से के रूप में इन उपग्रह इमेजरी को पब्लिश करते हुए ट्विटर हैंडलर @Detresfa_ ने कहा कि यह स्थान डोकलाम में चीन, भूटान और भारत के त्रि-जंक्शन के पास है, जहां 2017 में भारत और चीन की सेना के बीच स्टैंड-ऑफ हुआ था।
पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने अपने एयर डिफेंस इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण भारत और चीन के 2017 स्टैंड-ऑफ साइट से लगभग 50 किमी दूर किया जा रहा है।
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@Detresfa_ उपयोगकर्ता ने कहा कि – सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल साइट के रूप में पहचाने जाने वाले स्थान, क्लैश ज़ोन के आसपास भारत के मौजूदा Air Defence System की ताक़त को कम कर देंगे।
आपको बता दें की भारत इस क्षेत्र में डोकलाम और पूर्वोत्तर दोनों क्षेत्रों में चीनी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए नियमित रूप से निगरानी मिशन चला रहा है।
चीन की दबाव वाली रणनीति – Today News in hindi
भले ही भारत और चीन ने 73 दिनों के स्टैंड-ऑफ के बाद 2017 में डोकलाम से अपनी अपनी सेनाएँ वापस बुला ली थी, लेकिन पीएलए ने उन क्षेत्रों पर अपना वर्चस्व कायम रखा है जो उसमें पास थे।
चीन, भूटान पर डोकलाम सीमा विवाद पर समझौते के लिए दबाव बना रहा है, जिसके तहत बीजिंग चाहता है कि विवादास्पद क्षेत्र में चीनी होल्डिंग लाइन दोनों के बीच कार्य सीमा बन जाए।
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चीन ने पश्चिमी क्षेत्र में LAC के किनारे पर अपनी निर्माण गतिविधियों को जारी रखा है, साथ ही साथ भारत के साथ जुलाई से अब तक सैन्य वार्ता में कोई भी प्रगति नही दिख रही है और दोनों सेनाएँ अभी भी आमने-सामने हैं।
सुरक्षा और रक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों के अनुसार, चीनी निर्माण का उद्देश्य उन हजारों सैनिकों के लिए बैक-अप प्रदान करना है, जो लद्दाख के पास आगे बढ़ें हैं। साथ ही यह चीन की एक संभावित दबाव वाली रणनीति भी हो सकती है।
जुलाई में भारत की ओर से होने वाली गैलवान घाटी में वाई जंक्शन के पास से चीन की सेना आगे बढ़ते हुए देखा गया था, इसके बाद भारत और चीन के सेनाएँ आमने सामने आ गई थी।
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